नियमावली (Rules)

Driver Help Association (ड्राइवर हेल्प एसोसिएशन)

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धारा 1 : नाम, पंजीकृत कार्यालय एवं क्षेत्राधिकार

संस्था का नाम “Driver Help Association (ड्राइवर हेल्प एसोसिएशन)” होगा। संस्था का पंजीकृत कार्यालय वह स्थान होगा, जिसे कार्यकारिणी समिति द्वारा निर्धारित किया जाएगा तथा विधिवत अभिलेखों में दर्ज किया जाएगा। संस्था का कार्यक्षेत्र प्रारंभिक रूप से भारत के संबंधित राज्य/राज्यों तक सीमित होगा, जिसे आवश्यकता अनुसार सम्पूर्ण भारत तक विस्तारित किया जा सकता है। संस्था का पंजीकरण सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 अथवा संबंधित प्रचलित अधिनियम के अंतर्गत किया जाएगा।

धारा 2 : परिभाषाएँ

“संस्था/संघ” से अभिप्राय Driver Help Association से है। “समिति” से अभिप्राय कार्यकारिणी समिति से है। “पदाधिकारी” से अभिप्राय अध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष से है। “सदस्य” से अभिप्राय विधिवत स्वीकृत सदस्य से है। “वर्ष” से अभिप्राय 01 अप्रैल से 31 मार्च तक की अवधि से है।

धारा 3 : उद्देश्य

संस्था का उद्देश्य वाहन चालकों (ड्राइवरों) एवं उनके आश्रित परिवारों के आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं नैतिक विकास हेतु कार्यक्रमों का संचालन करना है। संस्था निम्न कार्य कर सकेगी: ड्राइवरों की समस्याओं के समाधान हेतु कल्याणकारी कार्यक्रम चलाना। शिक्षा, कौशल विकास एवं स्वरोजगार प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करना। स्वास्थ्य शिविर, टीकाकरण एवं चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना। महिला सशक्तिकरण एवं स्वयं सहायता समूहों का गठन। लघु उद्योग, कुटीर उद्योग, डेयरी, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन आदि को बढ़ावा। पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण एवं स्वच्छता अभियान। सामाजिक कुरीतियों की रोकथाम एवं जागरूकता कार्यक्रम। आपदा राहत एवं पुनर्वास कार्य।

धारा 4 : सदस्यता

कोई भी 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का महिला या पुरुष, जो संस्था के उद्देश्यों से सहमत हो, सदस्य बन सकता है। सदस्यता हेतु निर्धारित प्रपत्र में आवेदन करना अनिवार्य होगा। सदस्यता की स्वीकृति/अस्वीकृति का अंतिम अधिकार कार्यकारिणी समिति को होगा। प्रवेश शुल्क ₹101/- तथा वार्षिक सदस्यता शुल्क ₹250/- होगा, जिसे समिति आवश्यकता अनुसार संशोधित कर सकती है।

धारा 5 : सदस्यता समाप्ति

निम्न परिस्थितियों में सदस्यता समाप्त मानी जाएगी: लिखित त्यागपत्र देने पर। मृत्यु होने पर। न्यायालय द्वारा दंडित होने पर। लगातार तीन वर्षों तक शुल्क न देने पर। अनुशासनहीनता या संस्था विरोधी गतिविधि सिद्ध होने पर।

धारा 6 : कार्यकारिणी समिति

संस्था का संचालन 07 (सात) सदस्यीय कार्यकारिणी समिति द्वारा किया जाएगा, जिसमें अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष एवं अन्य सदस्य शामिल होंगे। समिति का निर्वाचन आमसभा द्वारा पाँच वर्ष की अवधि के लिए किया जाएगा। रिक्त पद की स्थिति में समिति शेष कार्यकाल हेतु मनोनयन कर सकती है, जिसे अगली आमसभा में अनुमोदित किया जाएगा।

धारा 7 : पदाधिकारियों के अधिकार एवं कर्तव्य अध्यक्ष

बैठकों की अध्यक्षता करना। निर्णायक मत का प्रयोग करना। संस्था के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करना। सचिव के अधिकार एवं कर्तव्य: बैठकों का आयोजन एवं कार्यवाही संधारण। पत्राचार एवं अभिलेखों की सुरक्षा। आय-व्यय विवरण प्रस्तुत करना। प्रशासनिक कार्यों का संचालन। कोषाध्यक्ष के अधिकार एवं कर्तव्य: आय-व्यय लेखा संधारण। राशि संग्रहण एवं बैंक में जमा। वित्तीय अभिलेखों का रख-रखाव।

धारा 8 : आमसभा

आमसभा संस्था की सर्वोच्च निर्णयकारी इकाई होगी। वार्षिक आमसभा प्रत्येक वर्ष अप्रैल माह में आयोजित की जाएगी। आमसभा के अधिकार: समिति का निर्वाचन, आय-व्यय की स्वीकृति, अंकेक्षक की नियुक्ति, नियमावली संशोधन

धारा 9 : बैठक एवं कोरम

कार्यकारिणी बैठक प्रत्येक तीन माह में होगी। कोरम कुल सदस्यों के दो-तिहाई उपस्थिति से पूर्ण होगा। विशेष बैठक आवश्यकता अनुसार बुलाई जा सकेगी।

धारा 10 : आय के स्रोत

सदस्यता शुल्क एवं प्रवेश शुल्क, दान, अनुदान, सरकारी सहायता, वैधानिक स्रोतों से प्राप्त आय

धारा 11 : बैंक संचालन

संस्था का समस्त कोष राष्ट्रीयकृत बैंक में संस्था के नाम से जमा होगा। निकासी अध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष में से किसी दो के संयुक्त हस्ताक्षर से की जाएगी।

धारा 12 : लेखा एवं अंकेक्षण

नियमित लेखा संधारित किया जाएगा। वार्षिक अंकेक्षण आमसभा द्वारा नियुक्त अंकेक्षक से कराया जाएगा। सक्षम प्राधिकारी द्वारा निरीक्षण संभव होगा।

धारा 13 : नियमावली संशोधन

नियमावली में संशोधन आमसभा के कम से कम 3/5 सदस्यों के बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा ही किया जाएगा।

धारा 14 : कानूनी कार्यवाही

संस्था से संबंधित किसी भी कानूनी कार्यवाही का प्रतिनिधित्व सचिव के पदनाम से किया जाएगा। अधिवक्ता की नियुक्ति कार्यकारिणी समिति की स्वीकृति से होगी।

धारा 15 : विघटन

संस्था का विघटन सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 की प्रासंगिक धाराओं के अनुसार किया जाएगा। विघटन हेतु आमसभा के 3/5 बहुमत की स्वीकृति आवश्यक होगी। विघटन उपरांत शेष संपत्ति किसी सदस्य में वितरित नहीं होगी, बल्कि समान उद्देश्य वाली पंजीकृत संस्था या सरकार को हस्तांतरित की जाएगी।